पति की गैर मौजूदगी में मैंने पड़ोस के २ लड़कों से बारी बारी से चुदवा लिया

मैं जसमीत सिंह कौर आप सभी का नॉन वेज स्टोरी में बहुत स्वागत करती हूँ. मैं भटिंडा की रहने वाली एक पंजाबन औरत हूँ. मेरे पति की बजाज २ व्हीलर की मोटर साइकिल की एजेंसी है. बड़ा कारोबार है. मेरे पति पैसा तो बहुत कमाते है पर मुझे यौन सुख नही दे पाते है. ना ही उनके पास मुझसे बात करने का समय है और मेरी यौन इक्षाओं को पूरा करने का तो उनके पास बिलकुल भी वक़्त नही है. जब वो रात में घर पर आते तो ही १२ बजे तक अपने कारोबार के काल अटेंड करते रहते है. ना ही मुझसे मेरे दिल का हाल जानना चाहते है और न ही मुझे रात में प्यार से चोदते है. बस जल्दी जल्दी २ मिनट में मेरा काम तमाम कर देते है.

जब भी मैं कुछ कहना चाहती हूँ तो बस एक बात ही कहते है “जसमीत !! मेरी जान ! तिजोरी से जितना दिल करे पैसा निकाल लो, पर मुझे डिस्टर्ब ना करो. दोस्तों, जब मेरे पति का यही व्यवहार शादी के बाद ६ सालों तक रहा तो मैं समझ गयी की वो ना ही मुझसे कभी रोमांस करेंगे और ना ही कभी मुझे रात भर चोदकर मुझे यौन सुख देंगी. मेरी एक सहेली मनविंदर कौर भी इसी तरह अपने पति से तंग थी. फिर वो काल बॉय को पैसा देकर घर बुला लिया करती थी और खूब चुदवाया करती थी. धीरे धीरे मैंने सोचना शुरू किया की मेरी यौन इक्षा को कोई और नही पूरा करेगा. मुझे ही इसके लिए पहल करनी होगी. मेरे मोहल्ले में २ आवारा लड़के थे जो मुझे बहुत पसंद करते थे. मेरी बुर मारना चाहते थे. मुझे जीभरके चोदना चाहते थे. वो दोनों रितेश और लकी मुझे भाभी भाभी कहकर बुलाते थे. मैंने सोच लिया की मैंने उन लडकों को रोजगार दूंगी.

उनको अपना जिगोलो बना लुंगी और खूब चुदवाउंगी. मैंने तुरंत रितेश और लकी को फोन लगाया और घर बुला लिया. दोनों बहुत हैंडसम थे. हमेशा आधी बाँही वाली टी शर्ट और जींस पहनते थे. दोनों खुशी खुशी मुझसे बात करने लगे.

“हेलो बच्चों, कैसे हो तुम दोनों??’ मैंने हंसकर पूछा. दोनों बड़े खुश थे क्यूंकि आज उनको मुझसे बात करने को मिल रही थी.

“क्या करे भाभी , इनदिनों हम थोड़ी टेंसन में है. बस कोई काम धंधा ढूँढ रहे है. कोई १० १५ हजार की नौकरी मिल जाती तो भी हमारा काम चल जाता” लकी और रितेश बोले.

“मेरे प्यारे देवरों , समझ लो तुमको नौकरी मिल गयी. आज से तुम दोनों मेरे लिए काम करोगे. तुम दोनों को मैं २० हजार महीना दूंगी. इसके बड़ले तुम दोनों को दोपहर १२ से ६ बजे मेरे घर में मेरे साथ रहना होगा और मेरी अधूरी यौन इक्षाओ को पूरा करना होगा. जिस जिस तरह मैं कहूँगी तुमदोनो मुझे चोदना पड़ेगा और अपना बेस्ट परफोर्मेंस देना होगा जिससे मुझे जादा से जादा मजा मिले” मैंने कहा. मेरी ऑफर सुनते ही दोनों खुशी से उछल पड़े.

“भाभी हमे आपका जिगोलो बनना पसंद है. हम दोनों कल से ही काम पर आ जाएँगे” लकी बोला

“हां! भाभी हम मेहनत से आपको चोदेंगे और खूब मजा देंगे” रितेश बोला. मैं भी खुश हो गयी. पैसो की मेरे पास कोई कमी नही थी. क्यूंकि मेरे पति लाखों करोड़ों रूपए महीना कमाते थे. अगले दिन ही लकी और रितेश मेरे घर दोपहर १२ बजे आ गये. मैंने अच्छी गुलाबी रंग की जोर्जेट की डिजाइन की नही साड़ी पहने थी. मैंने हम तीनो के लिए मेरे पति के बार से व्हिस्की , और सोडा की बोतले और फ्रिज से आइस क्यूब्स ले आई. हम तीनो ने एक एक ग्लास खत्म कर दिया. हल्का हल्का नशा हम तीनो को चड़ने लगा. मैं लकी और रितेश के साथ लॉबी में ही रुक गयी और सोफे पर बैठकर चुम्मा चाटी करने लगी. मैं बहुत ही हॉट लग रही थी. मैंने आगे से गहरा और पीछे से बैकलेस ब्लाउस पहन रखा था. मैं बिलकुल चोदने लायक सामान लग रही थी. दोनों मेरे आशिक जिनको मैंने जिगोलो की पोस्ट पर नौकरी दी थी मेरे साथ प्यार करने लगे. मेरे पति के पास वक़्त नही था पैसा था. उसी पैसे से मैंने अपने लिए प्यार करने वाले लकड़ों का इंतजाम कर लिया था. लकी और रितेश दोनों बारी बारी से मेरे दूध दबाने लगे मेरे होठ पीने लगे. मुझे बहुत अच्छा लगा दोस्तों.

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“लकी !! मेरी जान तुम मेरा ब्लाउस खोलो और रितेश तुम मेरी साड़ी निकालो” मैंने आदेश दिया. फिर दोनों जिगोलो अपने अपने काम पर जुट गये. दोनों मेरी साड़ी और ब्लाउस एक एक करके खोलने लगे. मैं खूब मजे ले रही थी. कुछ ही देर में मैं ब्रा और पेंटी में आ चुकी थी. लकी मेरे बूब्स को ब्रा के उपर से दबाने लगा. वही रितेश मेरी टांगो, घुटनों और जाघों को चूमने लगा. दोनों जिगोलो अच्छे से अपने काम को अंजाम दे रहे थे. फिर वो झूम झूम कर डांस करने लगे और एक एक कर अपने कपड़े निकलकर हवा में उड़ाने लगे. मैंने हम तीनो के लिए फिर से ३ जाम और बनाये. इस बार सोडा कम और व्हिस्की जादा रखी. कुछ टुकड़े आइस क्यूब डालकर हम तीनो ने फिर से चिअर्स किया. शराब पीने के बाद मुझे हर चीज ४ ४ , ५ ५ दिखने लगी. मुझे चढ़ गयी थी. वही लकी और रितेश को भी काफी चढ़ गयी थी.

उन दोनों ने अपने लिए एक एक जाम और बनाया और गटागट पी गये. अब मैं चुदाई का भरपूर आनंद लेने वाली थी.

“बोलो जसमीत भाभी क्या करना है??? कैसे करना है???” दोनों पूछने लगे.

“लकी !! मेरी जान, तुम ब्रा निकालो और रितेश तुम मेरी काले रंग की पेंटी उतारो..मगर प्यार और दुलार से” मैंने कहा. दोनों अपने काम पर लग गये. लकी मेरे ब्रा के हुक खोलने लगा और रितेश मेरी काली ब्रा निकलने लगा. दोस्तों कुछ ही देर में मैं नंगी हो गयी थी.

“भाभी आपको मैंने पहली बार बिलकुल नंगी देखा है. आपका फिगर तो बड़ा सेक्सी है. क्या फिर भी आपके हसबैंड आपको नही चोदते है??’ लकी भोलेपन से पूछने लगा.

“हाँ लकी , मेरी जान. मेरे पति को पैसा कमाने का इतना चस्का है की उसको मेरा ये सेक्सी फिगर दीखता ही नही है. इसलिए आज मुझे तुमदोनो खूब चोदो की मेरी चुदास की सारी आग शांत हो जाए” मैंने कहा. दोस्तों मैं इस वक़्त नंगी थी. बिलकुल कोहिनूर का हीरा लग रही थी. भूरे भूरे छल्लों वाले मेरे दूध चमक रहे थे. उधर मेरी गुलाबी चूत दोनों लड़को के लौड़े को बुला रही थी. मेरे बाल खुले थे, काले घने और घुटने तक लम्बे थे. मैं काम की साक्षात देवी लग रही थी. मेरे दोनों जिगोलो मेरे बदन को किसी भूखे भेड़िये की तरह घुर रहे थे. फिर वो दोनों मुझ पर टूट पड़े. लकी मेरे बेहद कसे और तने चुच्चे पीने लगा. और रितेश मेरी पैर की ऊँगली किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा. आज मैं खुलकर चुदना चाहती थी. खुलकर अपनी काम वासना क शांत करना चाहती थी. मैंने सोफे पर लेट गयी थी.

दोनों लड़के मेरे अगल बगल लेट गये थे. वो दोनों मुझसे प्यार और सिर्फ प्यार कर रहे थे. जैसे ही मैं सोफे पर लेट गयी, लकी मेरे दूध पीने लगा. और रितेश मेरे पैर की खूबसूरत ऊँगली को चुमते चुमते मेरी चूत की तरह बढ़ रहा था. मैं बहुत ही सेक्सी लग रही थी. दोनों जिगोलो अपने अपने काम में जुटे थे. लकी मेरी तनी हुई चुच्ची पी रहा था, वही रितेश मेरी गोरी गोरी जांघ को चूम रहा था. दोस्तों कुछ देर बाद मैं बिलकुल गर्म हो गयी.

“लकी !! मेरी जान जल्दी से मेरी चूत मारो!! अब मुझसे रहा नही जा रहा है..प्लीस जल्दी चोदो मुझे” मैंने कहा. ये सुनते ही मेरा पहला जिगोलो लकी जो अभी तक मेरे खूबसूरत और तने हुए बूब्स पी रहा था, उसने मेरे दूध पीना बंद कर दिया और मेरी बुर में अपना लौड़ा दे दिया और मुझे चोदने लगा. रितेश मेरे सर की तरफ आ गया. जब वो मेरे दूध पीने लगा तो मैंने उकसा पुष्ट लौड़ा पकड़ लिया और जोर जोर से मलने लगी. उधर लकी मुझे निचे से गपचिक गपचिक चोद रहा था.  मुझे बहुत सुकून मिल रहा था. कितना मजा आ रहा दोस्तों. दोनों जिगोलोस का लौड़ा १० १० इंच से बड़ा था और मेरे का तो सिर्फ ५ इंच का था. मैं मजे से लकी के लौड़े से चुदती थी और रितेश का लंड हाथ में लेकर फेटती रही.

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“चोदो लकी !! मेरी जान ,मेरे राज्जा !!! अपनी भाभी को आज जोर से और गहराई से चोदो” मैंने कहा. ये सुनकर लकी और भी जादा कामातुर हो गया. वो मुझे गपचिक गपचिक चोदने लगा. मेरी कमर अपने आप नाचने लगी. मैं पेट उठा उठाकर चुदवाने लगी. लकी मेरी बहुत मस्त खातिर कर रहा था. कुछ देर बाद वो मेरी फूली फूली भरी भरी चूत को ठोकता रहा. फिर झड गया. अब मेरा दूसरा जिगोलो रितेश मेरी बुर पर आ गया. उसने मेरी गांड के निचे तकिया लगा लिया. मेरी कमर, दोनों मांसल मस्त मस्त पुट्ठे और मेरी फटी लाल चूत अब उपर आ गये. रितेश को मेरी चूत का सुराग मिल गया. उसने अपना लौड़ा मेरे भोसड़े में डाल दिया और मुझे खाने लगा. अब मेरा पहला जिगोलो लकी मेरे बूब्स पीने लगा. मैंने उसका लौड़ा हाथ में ले लिया और फेटने लगी. इस तरह दोस्तों मैं बदल बदल के दोनों लकड़ो के लंड से जीभर के चुदवाया और यौन सुख प्राप्त किया.

फिर मैं लकी का लौड़ा चूसने लगी.

“जसमीत भाभी ! क्या आपके पति आपको अपना लौड़ा भी नही चुसाते है??’ लकी बोला.

“यही तो राज्जा !! उनको पैसा कमाने की हवस है की मेरी चूत की हवस वो देख ही नही पाते. कितना कहा मैंने उसने की मुझे अपका लौड़ा चुसना है, पर उन्होंने एक बार भी नही दिया” मैंने लकी को बताया.

“कोई बात नही भाभी !! आपने हमदोनो को जिगोलो की नौकरी दी है. हम आपको अपना लौड़ा रोज चुस्वाया करेंगे” रितेश बोला. फिर दोस्तों मैं दोनों भाइयों का लौड़ा बारी बारी से चूसने लगी. दोनों बिलकुल जवान मर्द थे. उसके लौड़े किसी खीरे की तरह थे. मैं मजे से मुँह में लेकर चूस रही थी. दोनों के सुपाड़े भी बेहद आकर्षक थे. मैंने बारी बारी से लकी और रितेश के लौड़े चुसे और खूब पिये.

“मेरे देवरों!! अब तुम दोनों ने अच्छा काम किया है. तुमदोनो ने मेरी चूत की आग शांत की है. पर अभी काम सिर्फ ५० परसेंट हुआ है. अभी तुम दोनों को मेरी गांड मारनी है” मैंने कहा.  दोनों बेहद खुश हो गये.

“जसमीत भाभी !! हम आपकी इक्षा जरुर पूरी करेंगे. पर गला जरा सूख गया है. एक एक जाम से जरा गला तर हो जाए तो क्या कहना” लकी बोला. मैं अपने पति के बार में फिर गयी और अंग्रेजी शराब की एक बड़ी बोतल ले आई. हम तीनो से २ २ ग्लास और शराब के पिये. अब फिर हमे नशा चढ़ने लगा. लकी मुझसे लिपट गया. मेरी बुर पीने लगा. वही मेरा दूसरा जिगोलो मेरी गांड पीने लगा. जब दोनों लडके एक साथ मेरी चूत और गांड पीने लगी तो मैंने “हाय भगवान!! हाय भगवान!!’ करने लगी. दोनों ने मुझे घोड़ी बना दिया. मुझे घुटनों और दोनों हाथों पर कुतिया बना दिया. लकी नीचे लेटकर मेरी बुर पी रहा था. वही रितेश पीछे से बैठकर मेरी गांड पी रहा था. मैं जन्नत का सुख ले रही थी. मैं फुल ऐश कर रही थी. फिर दोनों जिगोलो बारी बारी से मेरी गांड में ऊँगली करने लगे. मैं “हाय दैया !! हाय दैया !!” करने लगी. मैंने उन दोनों के हाथ रोकने की असफल कोशिश की. पर दोनों जवान लडके जोर जोर से मेरी गांड में ऊँगली करते ही रहे. एक बार भी नही रुके. मैं उनकी लम्बी लम्बी उँगलियों का मजा लेती रही. और गांड चुदवाती रही. मेरे मस्त चूतड़ों में दोनों अपना मुँह डालते रहे. उसने खेलते रहे. मैं मजा मरती रही. फिर वो दोनों जोर जोर से मेरे लपलपाते चूतड़ों पर जोर जोर से चांटे मारने लगे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. फिर लकी ने सबसे पहले मेरी गांड में अपना लौड़ा दिया.

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जब उसने मेरी गांड में लंड डाला तो गया ही नही. फिर मैंने उसको तेल की शीशी की तरह इशारा किया. फिर लकी ने कोई १०० ग्राम तेल अपने लौड़े में चुपड़ लिया. और थोडा मेरी गांड के छेद लगा दिया. फिर जब उसने लौड़ा डाला और धक्का दिया तो आराम से अंदर घुस गया. मेरा पहला जिगोलो लकी अब आसानी से मेरी गांड मार रहा था. मैं उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ओह्ह्ह्हह हा हाआआ करके गांड फड़वाने लगी. दोस्तों,, मेरे पति ने तो कभी मेरी गांड मारी नही. इसलिए मुझे मजबूरी में ये कदम उठाना पड़ा. लकी अपने दोनों घुटनों को मोडकर बैठकर मेरे पीछे था और मेरी गांड चोद रहा था. रितेश मेरे मुँह के पास आया और उसने मेरे मुँह में अपना हट्टा कट्टा लौड़ा दे दिया. मैं किसी आवारा कुतिया की तरह रितेश का लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी. उधर लकी मेरी गांड ले रहा था.

“ऊऊऊ उइउईईईईई आ आ आहा आहा !!’ करके मैं जोर जोर से आवाजे निकालने लगी. “लकी !! मेरे राजा ! और जोर जोर से …..मेरी गांड चोद !!…आहा आहा” मैं कामुक सिस्कारियां निकालने लगी. लकी जोर जोर से मेरी गांड लेने लगा. मुझे बहुत मजा आ रहा था दोस्तों. लकी और जोर जोर से मुझे लेने लगा. उसका लंड मेरे गुदा में मेरी प्रोस्टेट गंथ्री तक जाने लगा. जिससे मेरा दिमाग मुझे सुखद संदेश भेजने लगा. फिर लकी मुझे लेते लेते मेरी बुर में ऊँगली करने लगा. मैं सातवे आसमान में उड़ रही थी. लकी मुझे जोर जोर से ठोक रहा था. मेरे दोनों बड़े बड़े दूध निचे की तरह लटक रहे थे. उधर मैं अपने नाजुक गुलाबी ओंठ ने रितेश का लौड़ा लेकर मुख मैथुन कर रही थी. उसका माल बाहर की तरह बह रहा था. मैं मजे से उसको चूस रही थी. ये सब बहुत करिश्माई था. जहाँ मेरे पति सिर्फ २ ४ मिनटों के आउट हो जाते थे, वहां ३ ३ बार चुदकर मैंने अपनी सारी दबी यौन इक्षा पूरी कर ली थी. कुछ देर बाद लकी मुझे ठोकते ठोकते आउट हो गया. फिर रितेश ने मेरी गांड के चौड़े छेद में लंड दे दिया और मेरी गांड लेने लगा. अब लकी का लंड मैं मुँह में भरके मुख मैथुन करने लगी.

उधर मेरा दूसरा जिगोलो रितेश मेरे साथ गुदा मैथुन कर रहा था. वो फटर फटर करके आवाज करते हुए मेरी गांड ले रहा था. दोस्तों मैं तो जमीन पर बिलकुल नही थी. चाँद तारों के बीच विचरण कर रही थी. रितेश भी मुझे माशाअल्लाह तरह से ले रहा था. फिर कुछ देर बाद उसने अपना गर्म गर्म पानी मेरी खौलती गांड में छोड़ दिया. आपको ये कहानी कैसी लगी, अपनी कमेंट्स नॉन वेज स्टोरी पर लिखना ना भूलें.

नॉनवेज स्टोरी के सभी प्यारे पाठकों को धन्यवाद!!!



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